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रविवार, 13 दिसंबर 2020

भारतेंदु हरिश्चंद्र जी पर विशेष

 भारतेंदु हरिश्चंद्र

पूरा नाम- बाबू भारतेन्दु हरिश्चंद्र

जन्म- 9 सितम्बर सन् 1850

जन्म भूमि- वाराणसी, उत्तर प्रदेश

मृत्यु- 6 जनवरी, सन् 1885

नोट:- मात्र 35 वर्ष की अल्प आयु में ही इनका देहावसान हो गया था|

मृत्यु स्थान- वाराणसी, उत्तर प्रदेश

अभिभावक - बाबू गोपाल चन्द्र

कर्म भूमि वाराणसी

कर्म-क्षेत्र - पत्रकार, रचनाकार, साहित्यकार

उपाधी:- भारतेंदु

नोट:- डॉक्टर नगेंद्र के अनुसार उस समय के पत्रकारों एवं साहित्यकारों ने 1880 ईस्वी में इन्हें 'भारतेंदु' की उपाधि से सम्मानित किया|

(भारतेंदु- भारत+ इंदु अर्थात भारत का चंद्रमा )

 सम्पादन_कार्य :- 

1. कवि वचन सुधा-1868 ई.- काशी से प्रकाशीत (मासिक,पाक्षिक,साप्ताहिक)

2. हरिश्चन्द्र चन्द्रिका- 1873 ई. (मासिक)- काशी से प्रकाशीत

3.बाला-बोधिनी- 1874 ई. (मासिक)- काशी से प्रकाशीत


 प्रमुख_रचनाएं :- इनकी कुल रचनाओ की संख्या 175 के लगभग है-

 नाट्य रचनाएं:- कुल 17 है जिनमे 'आठ अनूदित व 'नौ' मौलिक नाटक है-

अनूदित नाटक- आठ

1. विद्यासुंदर- 1868 ई.- यह संस्कृत नाटक "चौर पंचाशिका" के बंगला संस्करण का हिन्दी अनुवाद है|

2.रत्नावली- 1868 ई.- यह संस्कृत नाटिका 'रत्नावली' का हिंदी अनुवाद है|

3. पाखंड-विडंबन- 1872 ई.- यह संस्कृत में 'कृष्णमिश्र' द्वारा रचित 'प्रबोधचन्द्रोदय' नाटक के तीसरे अंक का हिंदी अनुवाद है|

4. धनंजय विजय- 1873 ई.- यह संस्कृत के 'कांचन' कवि द्वारा रचित 'धनंजय विजय' नाटक का हिंदी अनुवाद है

5. कर्पुरमंजरी- 1875 ई.- यह 'सट्टक' श्रेणी का नाटक संस्कृत के 'काचन' कवि के नाटक का अनुवाद|

6. भारत जननी- 1877 ई.- इनका गीतिनाट्य है जो संस्कृत से हिंदी में अनुवादित

7. मुद्राराक्षस- 1878 ई.- विशाखादत्त के संस्कृत नाटक का अनुवाद है|

8. दुर्लभबंधु-1880 ई.- यह अग्रेजी नाटककार 'शेक्सपियर' के 'मर्चेट ऑव् वेनिस' का हिंदी अनुवाद है|


मौलिक नाटक- नौ

1. वैदिक हिंसा हिंसा न भवति- 1873 ई.- प्रहसन

2. सत्य हरिश्चन्द्र- 1875 ई.

3. श्री चन्द्रावली नाटिका- 1876 ई. 

4. विषस्य विषमौषधम्- 1876 ई.

5. भारतदुर्दशा- 1880 ई.- नाट्यरासक

6. नीलदेवी- 1881 ई.- गीतिरूपक

7. अंधेर नगरी- 1881 ई.- प्रहसन (छ: दृश्य)

8. प्रेम जोगिनी- 1875 ई.

9. सती प्रताप- 1883 ई.

- यह इनका अधुरा नाटक है बाद में ' राधाकृष्णदास' ने पुरा किया|

काव्यात्मक_रचनाएं :- इनकी कुल काव्य रचना 70 मानी जाती है जिनमे कुछ प्रसिद्ध रचनाएं:-

-प्रेममालिका- 

-प्रेमसरोवर-

-प्रेम पचासा

- प्रेम फुलवारी-

- प्रेम माधुरी-

- प्रेम तरंग

- प्रेम प्रलाप

- विनय प्रेम पचासा

- वर्षा- विनोद-

- गीत गोविंदानंद

-वेणु गीत -

-मधु मुकुल

-बकरी विलाप

-दशरथ विलाप

-फूलों का गुच्छा- 

- प्रबोधिनी

- सतसई सिंगार

- उत्तरार्द्ध भक्तमाल-

-रामलीला

-दानलीला

- तन्मय लीला

-कार्तिक स्नान

-वैशाख महात्म्य

- प्रेमाश्रुवर्षण

- होली

- देवी छद्म लीला

-रानी छद्म लीला

-संस्कृत लावनी

-मुंह में दिखावनी

-उर्दू का स्यापा

- श्री सर्वोतम स्तोत्र

- नये जमाने की मुकरी

- बंदरसभा

- विजय-वल्लरी- 

- रिपनाष्टक

- भारत-भिक्षा- 

- विजयिनी विजय वैजयंति- 

नोट-  इनकी सभी काव्य रचनाओं को 'भारतेंदु ग्रंथावली' के प्रथम भाग में संकलित किया गया है|

- 'देवी छद्म लीला', 'तन्मय लीला' आदि में कृष्ण के विभिन्न रूपों को प्रस्तुत किया गया है|

 उपन्यास:-

- हम्मीर हठ

- सुलोचना

- रामलीला

- सीलावती

- सावित्री चरित्र

निबंध :-

- कुछ आप बीती कुछ जग बीती


- सबै जाति गोपाल की

- मित्रता

- सूर्योदय

- जयदेव

- बंग भाषा की कविता

 इतिहास_ग्रंथ :-

- कश्मीर कुसुम

- बादशा

5 टिप्‍पणियां:

विलोम शब्द

#हिंदी__विलोम__शब्द: (#अति_महत्वपूर्ण )  1.अग्र – पश्च 2. अज्ञ – विज्ञ 3. अमृत -विष 4. अथ – इति 5. अघोष – सघोष 6. अधम – उत्तम 7. अपकार – उपक...